1. Hindi News
  2. राजस्थान
  3. इंडो-पाक इंटरनेशनल बॉर्डर से 15 किमी तक अतिक्रमण पर सख्ती, 41 सरहदी गांवों का बनेगा सिक्योरिटी मैप

इंडो-पाक इंटरनेशनल बॉर्डर से 15 किमी तक अतिक्रमण पर सख्ती, 41 सरहदी गांवों का बनेगा सिक्योरिटी मैप

 Reported By: Manish Bhattacharya, Edited By: Mangal Yadav
 Published : Jun 06, 2026 11:08 am IST,  Updated : Jun 06, 2026 11:17 am IST

जैसलमेर की ज़िला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने बताया कि सभी सीमावर्ती ज़िलों को सुरक्षा व्यवस्था लागू करने और साथ ही अंतरराष्ट्रीय सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में "अवैध कब्ज़ों और निर्माणों" का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं।

इंडो-पाक इंटरनेशनल बॉर्डर  - India TV Hindi
इंडो-पाक इंटरनेशनल बॉर्डर Image Source : REPORTER

जैसलमेरः अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में सुरक्षा व निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जैसलमेर जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने स्पष्ट किया है कि सीमा से 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में होने वाले सभी अतिक्रमणों का व्यापक सर्वे कराया जाएगा और नियमों के विपरीत पाए जाने वाले मामलों पर दिवाली से पहले कार्रवाई की जाएगी।

अवैध कब्जे पर होगी कार्रवाई

कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने बताया कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सीमावर्ती जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। बैठक का मुख्य फोकस अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में सुरक्षा, सूचना तंत्र और भूमि उपयोग की निगरानी को मजबूत बनाना रहा। उन्होंने कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण की पूरी जानकारी उपलब्ध हो। इसके लिए 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। यदि कोई अवैध कब्जा या नियमों के विरुद्ध निर्माण कार्य पाया जाता है तो उस पर तय समयसीमा में कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण सूचना संग्रहण प्रणाली को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, बीएसएफ, आईबी और सैन्य एजेंसियों के बीच होने वाली मासिक बैठकों को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। साथ ही पटवारियों, पशुपालकों, पूर्व सैनिकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इस नेटवर्क से जोड़कर एक मजबूत स्थानीय सूचना तंत्र विकसित किया जाएगा।

यहां देखें वीडियो

अनुपमा जोरवाल ने कही ये बात

अनुपमा जोरवाल ने अतिक्रमण की प्रकृति और उसकी फंडिंग को भी अहम मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति केवल खेती के उद्देश्य से जमीन का उपयोग कर रहा है तो स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन यदि सीमा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हो रहे हैं तो यह जानना आवश्यक है कि इसके लिए धन कहां से आ रहा है। ऐसे मामलों की गहन जांच की जाएगी।

यहां देखें वीडियो

प्रशासन अब जैसलमेर के 41 सीमावर्ती गांवों का एक विस्तृत नक्शा और डेटा बैंक तैयार करेगा, जिसमें जमीन की स्थिति, वहां निवास करने वाले समुदायों और वैध-अवैध निर्माण गतिविधियों की पूरी जानकारी शामिल होगी। सभी राजस्व अधिकारियों को इस कार्य के लिए निर्देशित किया गया है। सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे राज्य सरकार को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की रणनीति और कार्रवाई तय की जाएगी।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। राजस्थान से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।